
गुरु पूर्णिमा — 29 जुलाई
वैदिक पंचांग का एक विशेष महत्वपूर्ण दिन, जब आध्यात्मिक गुरु की ऊर्जा सर्वाधिक प्रबल हो जाती है। यह वह समय है जब गुरु की कृपा आत्मा को शुद्ध कर हर किसी को सत्य के प्रकाश के दर्शन कराने में समर्थ होती है। इस पवित्र दिन हम अपने गुरुजी के प्रति उनके मार्ग और शिक्षा के निष्ठापूर्वक अनुसरण द्वारा गहरी कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

गुरुदेव की आराधना के 3 दिन
गुरु पूर्णिमा के सम्मान में तीन दिवसीय कार्यक्रम में सम्मिलित हों। आश्रम उन सभी को आमंत्रित करता है जो हमारे गुरुजी के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं। दैनिक गुरु अभिषेक, गुरु दीक्षा और दर्शन, रात्रि सत्संग, भंडारा, कीर्तन और सेवा के अवसर।

गुरुजी के साथ गुरु महा अभिषेक — 29 जुलाई
गरिमामय गुरु अभिषेक और गुरु यज्ञ के तीन दिनों में सम्मिलित हों। अपनी भागीदारी का स्वरूप चुनें: सम्मानित मुख्य यजमान, आश्रम में उपस्थिति अथवा ऑनलाइन।

सेवा — गुरु की आराधना का सर्वोच्च रूप
आपकी सेवा भक्ति प्रकट करने और सचेत कर्मों द्वारा अपने कर्म को शुद्ध करने का सबसे मूर्त उपाय है। इस अवसर का उपयोग कर अपने भीतर निःस्वार्थ प्रेम की धाराएँ खोलें और गुरु की कृपा के असीम सागर को अपना जीवन बदलने दें। लोगों और गायों को भोजन कराएँ, गुरु के धाम को फूलों से सजाएँ और उत्सव के आयोजन में आश्रम की सहायता करें!

गुरु दीक्षा
सच्चा जन्म तब होता है जब आप अपने गुरु से मिलते हैं। एक प्रबुद्ध गुरु, हमारे गुरुजी श्री देव दास जी महाराज से दीक्षा और दिव्य दर्शन प्राप्त करने का अनूठा अवसर।
गुरु पूर्णिमा — आध्यात्मिक गुरु का पर्व
गुरु का स्वरूप ध्यान का आधार है। गुरु के चरण पूजा का आधार हैं। गुरु के वचन मंत्र के स्रोत हैं। गुरु की कृपा मोक्ष का स्रोत है।
गुरु पूर्णिमा सर्वोच्च आध्यात्मिक ज्वार का क्षण है, जब गुरु की ऊर्जा, कृपा के असीम सागर की भाँति, हमारे संसार में सर्वाधिक प्रकट होती है। इस दिन हम स्मरण करते हैं कि गुरु केवल एक मनुष्य नहीं, अपितु स्वयं परमात्मा का रूप हैं, जिनमें समस्त देवों की ऊर्जा केंद्रित है और जो हमें हमारे वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराती है। इस समय गुरु पर सच्ची एकाग्रता आत्मा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य बन जाती है, क्योंकि उन्हीं की कृपा से हम ईश्वर से जुड़ने की शक्ति पाते हैं।
गुरु पूर्णिमा के दिन व्यक्तिगत रूप से गुरु को नमन करने का अवसर सबसे बड़ा सौभाग्य माना जाता है। चाहे वह प्रत्यक्ष भेंट हो या आत्मा के सूक्ष्म स्तर पर सच्चा मिलन, गहरी श्रद्धा का यह क्षण हृदय की शुद्धि और जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति की कुंजी बन जाता है।


भक्ति का मार्ग
यदि भौतिक धन को कोई चोर चुरा ले, तो उसे फिर से अर्जित किया जा सकता है। परंतु यदि मनुष्य एक बार आध्यात्मिक धन अर्जित करने का अवसर चूक जाए, तो ऐसा अवसर उसे दोबारा नहीं मिलता।
इस दिन जो भक्ति का मार्ग खुलता है, वह सच्ची सेवा और प्रेम द्वारा आत्मा का ईश्वर से जीवंत संवाद है। सच्ची भक्ति औपचारिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं; वह तब जन्म लेती है जब हम पूरे हृदय से गुरु के मार्ग को स्वीकार करते हैं और पवित्रता, करुणा तथा समस्त प्राणियों की निःस्वार्थ सहायता के उनके उपदेशों को जीवन में उतारते हैं।
भक्ति यह बोध है कि आपका प्रत्येक कदम, प्रत्येक श्वास-प्रश्वास परमात्मा को अर्पण बन सकता है, जो दैनिक जीवन को निरंतर सेवा में बदल देता है और प्रेम की उन धाराओं को खोलता है जो आपके संपूर्ण अस्तित्व को रूपांतरित कर देती हैं।
28 – 30 जुलाई 2026
गुरु पूर्णिमा के सम्मान में 3 दिनों का पवित्र कार्यक्रम
गुरु पूर्णिमा के सम्मान में 3-दिवसीय कार्यक्रम — आध्यात्मिक साधना और सेवा में गहन निमज्जन का समय।
दैनिक अनुष्ठान
गुरु अभिषेकों और 3-दिवसीय गुरु यज्ञ में भाग लें।
प्रतिदिन भंडारा
ब्राह्मणों के लिए गरिमामय भोज, माता भंडारा और आश्रम के 20,000 अतिथियों का सामूहिक भोजन।
सेवा
बाबा अखंड कीर्तन या भंडारे के आयोजक बनें, आश्रम को फूलों से सजाएँ, पारंपरिक तुलादान और गौमाता सेवा में भाग लें।
गुरु दीक्षा
प्रतिदिन आप गुरुदेव का दिव्य दर्शन प्राप्त कर सकते हैं और दीक्षा लेकर आध्यात्मिक परिवार का हिस्सा बन सकते हैं।
29 जुलाई — गुरु पूर्णिमा
गुरुजी के साथ गरिमामय गुरु महा अभिषेक, महान गुरु यज्ञ पूर्णाहुति, गुरुदेव का दर्शन, 20,000 लोगों का सामूहिक भंडारा और रात्रि सत्संग कार्यक्रम।

वह अनुष्ठान चुनें
जिसमें आप भाग लेना चाहते हैं
गुरु पूर्णिमा के पवित्र अनुष्ठान — यज्ञ, अभिषेक और तुलादान। व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन भाग लें और इस कल्याणकारी कार्य में सम्मिलित हों।
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आपकी भागीदारी इस पवित्र आयोजन को हजारों लोगों के लिए विशेष बनाएगी और आपको व आपके प्रियजनों को कल्याण प्रदान करेगी।
आप एक या कई सेवाएँ चुन सकते हैं — जो हृदय को भाए। विवरण देखने और जुड़ने के लिए किसी पर भी टैप करें। 🙏
पवित्र ज्ञान
देवरहा बाबा के वचन
गुरु-तत्त्व (आध्यात्मिक गुरु का अस्तित्व, उनका सार, उनका स्वभाव), परमात्मा की भाँति, सर्वत्र विद्यमान है। दोनों में कोई अंतर नहीं है। आध्यात्मिक गुरु स्वयं परमात्मा का ही रूप हैं।
गुरु दीक्षा हेतु पंजीकरण
आप प्रतिदिन गुरुजी का दिव्य दर्शन पा सकते हैं और आध्यात्मिक परिवार का अंग बन सकते हैं। गुरुजी की छतरी में आएं और पवित्र दीक्षा लें।
